Showing posts with label Shikha Verma Shyari.. Show all posts
Showing posts with label Shikha Verma Shyari.. Show all posts

Saturday, 20 September 2014

Thursday, 21 August 2014

दोस्ती से कीमती कोई जागीर नही होती;

0

दोस्ती से कीमती कोई जागीर नही होती;
दोस्ती से खूबसूर्त कोई तस्वीर नही होती;
दोस्ती यूँ तो कचा धागा है मगर;
इस धागे से मजबूत कोई ज़ंजीर नही होती! —

एक जुर्म हुआ है हम से एक यार बना बैठे हैं

0

एक जुर्म हुआ है हम से एक यार बना बैठे हैं
कुछ अपना उसको समझ कर सब राज़ बता बैठे हैं
फिर उसकी प्यार की राह में दिल ओर जान गवा बैठे हैं
वो याद बहुत आते हैं जो हुमको भुला बैठे हैं

दर्द की बारिशों में हम अकेले ही थे,

0

दर्द की बारिशों में हम अकेले ही थे,
जब बरसी ख़ुशियाँ ...
न जाने भीड़ कहा से आई.........
कोई मुझ से पूछ बैठा 'बदलना' किस को कहते हैं?

सोच में पड़ गया हूँ मिसाल किस की दूँ ?
"मौसम" की या "अपनों" की ??   By Shikha Verma